Bhasha Kise Kahate Hain परिभाषा और उससे जुडी महत्वपुर्ण बाते।

इस पोस्ट में आप जानेगे की Bhasha Kise Kahate Hain उसका इतिहास और उससे जुडी हुई सभी महत्वपुर्ण बाते आज हम आपको आसान भाषा में समझाने वाले है। वैसे तो आज दुनिया में 7000+ से भी ज्यादा भाषाएँ बोली और लिखी जाती है। लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था शुरुवात में इंसान सिर्फ इशारो में बाते किया करता था।

लेकिन इसमें एक कमी थी इशारो से सिर्फ कुछ ही संकेत आपस में समझे जा सकते थे। इसलिए फिर धीरे-धीरे भाषा का निर्णाम हुआ। वो कहते है ना आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।

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Bhasha Kise Kahate Hain (Defination)

भाषा वह साधन है जिसके जरिये हम बोल कर, लिख कर या इशारो से अपने भावो और विचारो को दुसरो को समझा सकते है।

केवल बोलने को ही भाषा नहीं कहते आप जिस भी तरीके से दुसरो को अपनी बात समझा सके उसे ही भाषा कहा जाता है। आशा करता हु की अब आप Bhasha Kise Kahate Hain यह समझ गए होंगे।

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भाषाओ के प्रकार

भाषाएँ 3 प्रकार की होती है –

  1. सांकेतिक
  2. मौखिकः
  3. लिखित
  4. सांकेतिक यानी इशारो से अपने भावो समझाना- जब आप अपनी कोई बात किसी दूसरे व्यक्ति को इशारो से समझाते है तो इशारो की भाषा होती है।

उदाहरण के लिए मान लीजिये आप किसी ना सुन पाने वाले वाले व्यक्ति से इशारो में बात कर रहे है और आप अपनी बातो को आपस में समझा पा रहे है तब हम इसे भाषा कहेगे।

  1. मौखिक : यानी आवाज से अपने भावो को समझाना- वक़्त के साथ इंसान ने बोलना सीखा और तब ध्वनि के माध्यम से वो एक दूसरे को अपने भावो और विचारो को समझाने लगे। इस मुख ध्वनि से एक दूसरे को अपने विचारो को समझाने को बोलने वाली भाषा यानी मौखिक भाषा कहते है।
  2. लिखित : यानी लिख कर अपने भावो को समझाना- जैसे-जैसे मानव का विकास हुआ उन्होंने अपनी बातो को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए लिखित भाषा का निर्माण किया। अपने विचारो और भावो को लिखित रूप से दूसरे को समझा सकने को लिखित भाषा कहते है।

वैसे तो दुनिया में बहुत सी भाषाएँ बोली जाती है जैसे अंग्रेजी जापानी आदि। सब भाषाओ का अपना महत्व और इतिहास है। लेकिन आज हम हिंदी भाषा की बात करेंगे और जानेगे इसके इतहास और उत्पति के बारे में।

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हिंदी भाषा का इतिहास

भारत में अगर कोई किसी से पूछे की Bhasha Kise Kahate Hain तो तुरंत जवाब मिलेगा की हिंदी को ही भाषा कहते है। लेकिन हमने आपको पहले ही भाषा की परिभाषा समझा दी है।

अब आते है हिंदी भाषा पर और जानते है की कैसे ये भारत की इतनी लोकप्रिय भाषा बनी। वैसे तो इस बात के कोई साक्ष्ये नहीं है की कब से हिंदी उत्पत्ति में आई।

लेकिन कहा जाता है की 1000BC में संस्कृत के बाद से हिंदी अस्तित्व में आने लगी। और धीरे धीरे समय के साथ इसका विकास हुआ।

हिंदी को संस्कृत से ही निकली हुई भाषा माना जाता है। आज हिंदी ही आधुनिक भारत की मूल भाषा है और इसी से और भी बहुत सी उपभाषाओं का जन्म हुआ है जैसे पश्चिमी हिन्दी, राजस्थानी, गुजराती, पंजाबी आदि।

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भाषा कैसे बनती है 

किसी भी भाषा को सर्वजन की भाषा तभी कहा जा सकता है जब उसकी एक व्याकरण हो। जैसे हिंदी भाषा की व्याकरण है देवनागरी।

व्याकरण किसी भाषा की आत्मा की तरह होती है जो इसे जीवन प्रदान करती है। व्याकरण के माध्यम से ही आप उस भाषा को उसके तीनो रूप लिखती, मौखिक और सांकेतिक रूपों में ढाल सकते है।

दुनिया में बोली जाने वाली लगभग हर भाषा की एक व्याकरण होती है जैसे आपके देखा भी होगा की इंग्लिश सीखने के लिए आपको उसकी grammer सिखाई जाती है।

ठीक उसकी तरह हिंदी के लिए भी उसकी व्याकरण सिखाई जाती है। हमारे भारत देश में बहुत सी भाषाएँ बोली जाती है लेकिन हिंदी को ही भारत की भाषा माना गया है।

Bhasha Kise Kahate Hain में ये समझना बहुत जरुरी है की बोली और भाषा में क्या अंतर है। बोली आम लोगो में एक दूसरे को अपनी बात समझा पाने को कहते है।

इसका कोई व्यवस्तिथ नियम नहीं होता, इसमें शब्दों को घुमाया और बदला जा सकता है। वही बात करे भाषा की तो ये एक व्यवस्तिथ बोली होती है एक दूसरे से बात करने की। इसकी एक व्याकरण होती है और नियम होते है शब्दों को प्रयोग करने के।

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भाषा के विभिन रूप

एक व्यक्ति या नागरिक 4 प्रकार की भाषाओ का इस्तेमाल करता है-

  1. मातृ भाषा- ये वो बोली या भाषा होती है वो इंसान अपने घर से सीखता है। इसमें माता पिता का हैं role होता है। वो ही सबसे पहले एक शिशु को भाषा से रूबरू करते है।
  2. राजभाषा- ये वो भाषा होती है काम काजो में इस्तेमाल होती है। यानी जिस भाषा को हम अपने सरकारी कामो में लिखित रूप में इस्तेमाल करते है।
  3. संपर्क भाषा- आपसी लोगो में हम बहुत से तरीको से संपर्क करने के तरीके ढूंढ लेते है जो भाषा का हिस्सा नहीं होती लेकिन आपस में आप समझ जाते है।

उदहारण के लिए सिर्फ हाथ हिला कर हम किसी को हेलो बोल देते है या सर हिला कर yes no बोल पाते है। इसी तरह के बहुत से संकेत हम दैनिक जीवन में इस्तेमाल करते है इसे ही संपर्क भाषा कहते है।

  1. राष्ट्रभाषा- जो भाषा किसी देश के अधिकतम हिस्सों में बोली जाती है उसे राष्ट्र भाषा कहते है। बहुत से देस्ख में ये लिखित में होता है की उनकी कोनसी भाषा राष्ट्र भाषा कही जाएगी। लेकिन भारत में बहुत साड़ी भाषाएँ बोली जाती है इसलिए यहाँ किसी एक भाषा को लिखित में राष्ट्र भाषा नहीं कहा गया पर हिंदी को हम राष्ट भाषा मान सकते है।

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आखिर में Bhasha Kise Kahate Hain 

उम्मीद है आपको Bhasha Kise Kahate Hain परिभाषा और उससे जुडी महत्वपुर्ण बाते। इस पोस्ट से भाषा किसे कहते है और उससे जुडी सभी जानकारी मिल गई होगी। हमने कोशिश की है की आपको सारी जानकारी आसान भाषा में समझा सके।

अगर आपके अभी भी Bhasha Kise Kahate Hain इसे सम्बंधित कोई सवाल है या हमारे लिए कोई सुझाव है तो आप हमें कमैंट्स में लिख सकते है। जानकारी पसंद आई हो तो इसे शेयर करना न भूले।

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