चाणक्य निति की छः बाते, जो आपको मालुम होनी चाहिए। जो कुछ इस प्रकार है

मुझे वह दौलत नहीं चाहिए जिसके लिए कठोर यातना सहनी पड़े, या सदाचार का त्याग करना पड़े या अपने शत्रु की चापलूसी करनी पड़े।  

काँटों से और दुष्ट लोगो से बचने के दो उपाय है। पैर में जूते पहनो और उन्हें इतना शर्मसार करो की वो अपना सर उठा ना सके और आपसे दूर रहे।  

जो अस्वच्छ कपडे पहनता है। जिसके दात साफ़ नहीं है। जो बहुत खाता है। जो कठोर शब्द बोलता है। जो सूर्योदय के बाद उठता है। उसका कितना भी बढ़ा व्यक्तित्व क्यों ना हो। वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जाएगा।  

एक व्यक्ति को चारो वेद और सभी धर्म शास्त्रों का ज्ञान है। लेकिन उसे यदि अपने आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है, जिसने अनेक पकवानो को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा।  

जो बिट गया सो बीत गया सो बीत गया। अपने हातो से कोई गलत काम हो गया हो तो उसकी चिंता छोड़ते हुए वर्तमान को सही तरीके से जी कर भविष्य को सवारना चाहिए।  

अगर कोई सांप जहरीला नहीं है, तब भी उसे फुफकारना नहीं छोड़ना चाहिए। उसी तरह कमजोर व्यक्ति को भी हर वक्त अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए।  

शादी के बाद गूगल पर क्या सर्च करती है नई नवेली दुल्हन